Gita 1:44

Gita Chapter-1 Verse-44

प्रसंग-


इस प्रकार स्वजन-वध से होने वाले महान अनर्थ का वर्णन करके अब अर्जुन[1] युद्ध के उद्योग, रूप और कृत्य पर शोक प्रकट करते हैं-


उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भरतीत्यनुशुश्रुम ।।44।।



हे जनार्दन[2] ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं ।।44।।

Krishna, we hear that men who have lost their family traditions dwell in hell for an indefinite period of time. (44)




Verses- Chapter-1

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Chapter
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References and context

  1. Mahabharata के मुख्य पात्र है। पाण्डु एवं कुन्ती के वह तीसरे पुत्र थे। अर्जुन सबसे अच्छा धनुर्धर था। वह द्रोणाचार्य का सबसे प्रिय शिष्य था। द्रौपदी को स्वयंवर में जीतने वाला भी वही था।
  2. मधुसूदन, केशव, वासुदेव, माधव, जनार्दन और वार्ष्णेय सभी भगवान् कृष्ण का ही सम्बोधन है।

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